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और...ख़ुदा नें छुपा लिया ,अपनें घुटनों में ,अपना चेहरा .............

Posted On: 17 Jan, 2016 Others,कविता,Hindi Sahitya में

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और….
खुदा देखता रहा
अपने नाम पर
जारी होते
कत्लेआम के तमाम
बर्बर आदेश .
और ……
खुदा देखता रहा
अपने नाम पर
जायज होते ,जारी होते ,
अमल में आते
लूट ,हत्या अपहरण ,बलात्कार के
दिल दहलाते हादसे
और ….
खुदा खुश होता रहा
मुस्कराता रहा
सफ़ेद इबारत बाले
काले झंडे के नीचे
बैठा सुनता रहा
गोलियों की तड़तड़ाहट
बमों के धमाके
रिहायश से उठतीं
अल्लाह हो अकबर -
की चीत्कारें
और …..
मौत के बाद का -
पसरा सन्नाटा
और …..
बदहवास भागते -
दहशतजदा इंसान
और ..
खुदा नें छुपा लिया
अपनें घुटनों में -
अपना चेहरा .
शायद ,
न देखनें के लिए
धर्म के नाम पर उपजा
यह उन्माद .
और……….
………………

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

nishamittal के द्वारा
February 17, 2016

अर्थपूर्ण रचना

Bhola nath Pal के द्वारा
February 17, 2016

निशा जी, प्रतिक्रिया हेतु आभार .

harirawat के द्वारा
February 18, 2016

भोला नाथजी, नमस्कार ! कविता पढ़ी और खुदा के घुटनोंके बीच छिपा चेहरा स्पष्ट नजर आ रहा था, सोचता रहा की अगर छिपा हुआ चेहरा इतना दमक रहा है अगर चेहरा खुला हुआ होता तो क्या होता ? अच्छी कविता के लिए साधुवाद !

Bhola nath Pal के द्वारा
February 20, 2016

श्री रावत जी ! खुदा के नाम पर होरहा कत्लेआम क्यों नहीं रुकता ?ब्लॉग से जुड़नें के लिए धन्यवाद


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