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सूअर की टट्टी

Posted On: 17 Feb, 2016 कविता,Junction Forum,Hindi Sahitya में

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सूअर की टट्टी
टट्टी की टट्टी
रिसाइकल्ड टट्टी
क्या करें
कहाँ लेजाएं
क्या हो इसका
न लीपने की -
न पोतने की
दिमाग सडा दिया
सूअर की टट्टी ही तो है -
देश द्रोह
और …
इसे फैलांनें बाले
सूअर l सूअर i सूअर ………..

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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
February 17, 2016

श्री भोला नाथ जी पहले हैडिंग देख कर आश्चर्य हुआ जब आपकी गजब की देशद्रोह पर टिप्पणी देख क्या ख़ुशी मिली बता नहीं सकती मैं हंसी नहीं ठहाके लगाये यह है देश द्रोह के खिलाफ भारत की आत्मा

bhagwandassmendiratta के द्वारा
February 17, 2016

आक्रोश हर राष्ट्रभक्त हिन्दुस्तानी के ह्रदय में आक्रोश आतंकवाद और देशद्रोह के विरुद्ध आक्रोश आपकी कविता से भी भरपूर उच्छल रहा है|

Bhola nath Pal के द्वारा
February 17, 2016

आदरणीय डॉ. शोभा जी, समय कहता है देश द्रोह की निंदा ही न की जाये, हमारे बस में जो है अवश्य किया जाये . सहमति के लिए धन्यवाद.

Bhola nath Pal के द्वारा
February 17, 2016

श्री भगवन दस जी !प्रतिक्रिया का स्वागत i आभार ……

Philly के द्वारा
October 17, 2016

I’m impressed by your writing. Are you a professional or just very knwoeldgeable?


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