गहरे पानी पैठ

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बोली मेरी लगाओ .............

Posted On: 18 Apr, 2016 कविता,Junction Forum,Hindi Sahitya में

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लाख कोशिश की
तू दिल से निकला ही नहीं,
कैसा यह अक्श है
इसे दिल से निकालो यारो i
***************************
दो कदम ही सही
इस नूर को लेकर चलो,
इसमें ही न खो जाओ
तो बताना यारो l
*************************
सब ही खरीददार हैं
तुम भी खरीदोगे,
प्यार जहाँ बिकता हो
वो हाट दिखा दो यारो l
**********************
क्यों कहते हो
जरा सज लो, ओ संवर लो,
दिल की इस चाहत को
नजरों मैं ही निखारो यारो l
******************************
चाहत का दर्द सबको
लगता है मीठा-मीठा,
अपनी खुशनसीबी पर
कितना भी इतराओ यारो l
***************************
जिसको तलब हो ज्यादा
बोली मेरी लगाओ,
सौदा बुरा नहीं है
हालात बुरे हैं यारो l
*******************

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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Mohammad Arif के द्वारा
April 19, 2016

वाह! क्या मूल्यांकन है । बधाई हो

Bhola nath Pal के द्वारा
April 22, 2016

ह्रदय से आभार श्री आरिफ जी !

Shobha के द्वारा
April 22, 2016

भोला नाथ जी बहुत सुंदर भाव मैने पहले भी लिखा था परन्तु शायद कोइ प्राब्लम थी चाहत का दर्द सबको लगता है मीठा-मीठा, अपनी खुशनसीबी पर कितना भी इतराओ यारो  अति भाव पूर्ण

Bhola nath Pal के द्वारा
April 23, 2016

आदरणीय डॉ शोभा जी !जब जो आया जी में ,मैं लिखने से गुरेज नहीं करता .इमेज की परवाह किये बिना कुछ भी लिख जानें के लिए क्षमा चाहूंगा .आपकी लेखनी का स्पर्श सुखद लगता है .सादर ………..

Eliza के द्वारा
October 17, 2016

Awesome you should think of sonehtimg like that


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