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कानून व्यवस्था का निवेश ...........

Posted On: 13 May, 2016 कविता में

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विकास ही विकास
अटे पड़े अख़बार
बुद्धिजीवी सहमे सहमे
सच्चाई बदहवास I
*****************
अपना प्रदेश
उत्तम प्रदेश
काश होता यहाँ
कानून व्यवस्था का निवेश I
*****************
उपलब्धियां –
अनन्त I
गृह कर ,जल कर ही क्यों
वायु कर और लगाओ
समस्या ख़त्म
न रहेगा बांस
न बजेगी बांसुरी I
************************
चार ईंटों में बैठा –
हर इंसान -
अमीर नहीं होता
तुम क्या जानों
निरीह ,
अपना वक्त कैसे ढोता I
*********************
नेता -
मज गया हैं….
जनता,
कीचड़ भरी गलियों से
इस लिए ले जाती
कुछ करेंगे
नेता कहते ….
तुम्ही क्यों
हम भी सहेंगे
चप्पल हाथ में
गली पार
न कोई शर्म ,
न तकरार I
******************
विकास ?
हुआ है
पानी की टंकियां
सफ़ेद ऐरावत सी
आकाश गंगा पर बहतीं हैं I
****************************
किसान की चादर
पहले फटी थी
अब पेबंद लगी है…..
*********************
अनुदान का रुपया,
पहले पंद्रह पैसे का था,
अब पचास का I
***********************
बादल आते,
सम्मोहन से बंधे से,
किसी को सराबोर कर जाते,
किसी को मुंह चिढ़ाते I
***********************
दिन में -
मैरा के नीचे,
रात में,
मैरा के ऊपर,
लगती है,
किसान की चौपाल,
मेट्रो ,एक्सप्रेस -वे ,ड्रीम प्रोजेक्ट वालो I
किसानों को देखो
वहीँ से उदय होता है
देश प्रदेश का -
भाग्य I
**********************
” पेंशन ,पट्टा,जॉब -
अनुग्रह ,अनुदान ” ?
मुंडन -
पहले जन्म के बाद होता था
अब -
जन्म के पहले I
******************
” देश अमीर
जनता गरीब ”
प्रभुता और पद,
जब तक नहीं नापते,
एक ही पैमाने से,
सबके कद,
बात नहीं बनेगी I
*****************
दो पल ,
सबके बीच,
खड़े हो,
सबको समझो,
सबको समझाओ,
अपनी ख़ुशी में,
सबको हँसाओ,
सबके गम में,
खुद को रुलाओ,
घड़ियाली नहीं,
दिल से दिल मिलाओ I
****************
मैं-
न हँसता हूँ ,न रोता हूँ,
सिर्फ-
सकते में हूँ,
कि क्या हो रहा है ?
कि इंसान जाग रहा है,
कि सो रहा है ?

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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
May 14, 2016

श्री भोला नाथ जी उत्तम कविता आज कल की स्थित का वर्णन बादल आते, सम्मोहन से बंधे से, किसी को सराबोर कर जाते, किसी को मुंह चिढ़ाते िसच लिखा है आपने कुछ क्षेत्रों में बादल बरसते नहीं हैं आते हैं निकल जाते हैं सकते में हूँ, कि क्या हो रहा है ? कि इंसान जाग रहा है, कि सो रहा है ? देश का यही हाल है

jlsingh के द्वारा
May 16, 2016

आदरणीय भोला नाथ जी, बेहतरीन अभिव्यक्ति हुई है, आदरणीया शोभा जी से भी सहमत हूँ. नमस्कार!

Bhola nath Pal के द्वारा
May 16, 2016

आदरणीय डॉ शोभा जी ! स्वागत ,प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

Aneisha के द्वारा
October 17, 2016

Good point. I hadn’t thhuogt about it quite that way. :)

Gerry के द्वारा
October 17, 2016

You really found a way to make this whole prcseos easier.


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