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भारत अपना भाग्य लिख रहा ...........

Posted On: 5 Sep, 2016 कविता,Hindi Sahitya,Others में

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भारत अपना भाग्य लिख रहा
विश्व पटल पर स्वर्ण प्रभा में
भारत भारतवर्ष लिख रहा i
*******************************
हर दिन नयी सुबह का स्वागत
हर शाम सुखद बन आती ,
स्वांस स्वांस से अवगुंठित हो
जीवन राग सुनाती
आँगन आँगन सुख का सौरभ
द्वार द्वार उल्लास दिख रहा i
*****************************
पुलकित धरा बुलाती नभ को
देखो मेरी हरियाली,
और उदार हृदय नभ कहता
तुम्हे समर्पित खुशहाली,
ऐसी बही बयार कि भारत
नित नवीन इतिहास लिख रहा l
*****************************
एक हृदय स्पंदित हो कर
प्राणवायु बन जाता जब,
एक हृदय अपने उजास से
नई सुबह ले आता जब,
तब जाता सन्देश धरा को
एक ह्रदय में त्याग लिख रहा i

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
September 5, 2016

श्री भोला नाथ जी बहुत समय बाद आपको खूबसूरत कविता के साथ ब्लॉग पर देखा पुलकित धरा बुलाती नभ को देखो मेरी हरियाली, और उदार हृदय नभ कहता तुम्हे समर्पित खुशहाली, ऐसी बही बयार कि भारत नित नवीन इतिहास लिख रहा lपूरी कविता ही दिल को खूबसूरत यह पंक्तिया और भी सुंदर

Carrie के द्वारा
October 17, 2016

I rellay needed to find this info, thank God!


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