गहरे पानी पैठ

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जब तक बदला नहीं लेलिया जाता ......

Posted On: 18 Sep, 2016 social issues,कविता,Junction Forum में

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मैं स्तब्ध हूँ
आक्रोशित भी,
ह्रदय व्यथित है
किन्तु कुछ कह सकने में
फ़िलहाल असमर्थ i
मैं नवाज होता
कुछ भी बक जाता
मन कहता है -
झंडा झुका दिए जाएं
इससे बड़ा राष्ट्रीय शोक -
और क्या होगा |
हम कुछ करें ,न करें
अंत्येष्टि श्रद्धांजलि तो-
दायित्व है
ह्रदय हूकता है
सुना है
रोने से गम हल्का हो जाता है
सो -
आंशू न बहाये जांय
देखा जाये
कैसा लगता है
गम को ढोना
और शायद
तब ही समझ पाएंगे हम
गम की पीड़ा
तब ही याद रहेगा हमें
कि -
हमें बदला लेना है
कल ही लिखा था मैंने……
”हम रुकते हैं –
संयम बन कर,
चलते हर अवरोध तोड़कर,
प्यार निभाते -
हृदय बिछाकर,
बदला लेते राह रोककर |
औसत कोई चीज न हममें
जो कुछ हैं -
हम सिर्फ शिखर हैं,
शीतल हैं तो चाँद सरीखे
तपते हैं-
तो सूर्य प्रखर हैं”
क्या करूँ
प्रतिज्ञा करता हूँ
न प्रेस किये कपडे पहनूंगा
न तकिया लगाऊँगा
जब तक
बदला नहीं ले लिया जाता |

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
September 19, 2016

श्री भोला नाथ जी मन को छूने वाली पँक्तिया पंक्तियों में आपका विद्रोही मन बोल रहा है

Bhola nath Pal के द्वारा
September 19, 2016

आदरणीय डॉ शोभा जी आभार ………!


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