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राम का विजय रथ ............

Posted On: 10 Oct, 2016 कविता,Junction Forum,Hindi Sahitya में

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यह संघर्स,
यह होड़,
क्यों ?
जीवन रूपी बृक्ष पर
पुष्पित ,पल्लवित ,फलित -
हो रहा अज्ञान
रोके है
सफलता का द्वार
कुछ पानें नहीं देता
प्रश्न ?
भाग्य का नहीं
कर्म का भी नहीं
अज्ञानता का है
कुण्डी -
अंतस की बंद है
दौड़ रहे हैं बाहर
ऊपर से
सब कुछ -
खो जानें का भय
लुट जाने का भय
कुण्डी -
अंतस की लगी है
दौड़ रहे हैं बाहर |
……………
यह जो केंद्र है
वहां -
आलोक ही आलोक है
अन्याय, अज्ञान, अंधकार -
का प्रतीक रावड़
सारी शक्ति समेत कर भी
नहीं रोक पाता
राम का विजय रथ
जन गन मन का
यथेष्ठ पथ |

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Keiffer के द्वारा
October 17, 2016

Thakns for taking the time to post. It’s lifted the level of debate

Shobha के द्वारा
October 17, 2016

श्री पाल जी हर कविता की तरह खूबसूरत कविता अंतिम बेहद अच्छी लगी नहीं रोक पाता राम का विजय रथ जन गन मन का यथेष्ठ पथ |




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