परिवर्तन आहट से अंजाम तक

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परिवर्तन का आह्वान ..........

Posted On: 2 Dec, 2016 कविता,Junction Forum,Hindi Sahitya में

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टूटती सांसों ने
निशा से कहा
देखली न
तूनें !
मेरे पतन की -
पराकाष्ठा I
बद-दामिनी झेलते-
तेरी ममता की,
शुभ्रता -
मेरे अंतस की
कितनी न कराही !
देखली न
तूनें
मेरे पतन की
पराकाष्ठा !
काली रात ,
जुगनुओं का क्रम ,
बहुत सह चुके
तुम्हारे –
शुक्ल पक्ष का भ्रम ,
उगने दो अब
सत्य का सूरज
सत्ता अंधियारों की
अब -
मरे या भाड़ में जाय
होनेदो परिवर्तन I
रे कलुष !
तेरे नहुष
बहुत कर चुके
भ्रम का तांडव
गानें दे अब
प्रभा को-
परिवर्तन गीत
मनानें दे अब
प्राची को –
स्वागत रीत I
देख !
सजाकर पुष्प थाल
प्राची -
देनें को पैगाम
चल पड़ी है करनें
परिवर्तन का आह्वान ………

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
December 6, 2016

सजाकर पुष्प थाल प्राची – देनें को पैगाम चल पड़ी है करनें परिवर्तन का आह्वान ! अति सुन्दर और पठनीय कविता ! आदरणीय भोला नाथ पाल जी ! सादर अभिनन्दन और हार्दिक बधाई !

Bhola nath Pal के द्वारा
December 6, 2016

आदरणीय सद्गुरु जी ! आत्मिक आभार ….सादर

Shobha के द्वारा
December 9, 2016

श्री भोला नाथ जी सभी पंक्तियाँ खुबसूरत हैं

Bhola nath Pal के द्वारा
December 11, 2016

आदरणीय डॉ शोभा जी !कविता पढनें के लिए धन्यवाद




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