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स्थिर नीति बनें ..............

Posted On: 4 Dec, 2016 कविता,Junction Forum,Hindi Sahitya में

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जो कठोर है ,
दुष्ट है ,
चोट पहुचाता है ,
एक कलंक
अपने नाम पर
जितना निर्बल -
उतना अश्थिर
बिंदु बिंदु बिखरा -
भयाक्रांत ,
विकृत चिंतन से अभिशप्त
स्वयं में -
एक प्रश्न चिन्ह,
एक समस्या
स्वयं के लिए ,
पड़ोस के लिए ,
विश्व के लिए i
हर रग दुखती जिसकी ,
जरा दबाओ
नानी के साथ
गाँधी जी अहिंसा सब
याद आने लगते
बड़बोला इतना
कि…….
एटम बम से नीचे
बात नहीं करता ,
जुबान इतनी कड़वी
कि
उर्दू शर्मा जाय,
निरा बहसी ,
बर्बर मुल्क i
मारने मरनें पर आमादा
अशिक्षा से अभिशप्त
धर्मभीरु इतना
कि-
ख्याली जन्नत के लिए
जीती जागती -
जन्नत को-
आग लगाने बाला-
पाकिस्तान i
स्थिर नीति बनें
इसके लिए i

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