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सूर दास का एक पद ..........

Posted On: 11 Dec, 2016 कविता,Junction Forum,Hindi Sahitya में

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कहो रे कोई हरि आबन की बात I
वही वृज लता वही बृज कुंजैं वही तरुवर वही पात,
जबतें बिछुडो नन्द सांवरो चैन नहीं दिन रात I
कहो रे कोई ……….
मंदिर अर्ध अवधि हरि बद गए हर अहार टर जात,
अजिया भखन अजहुं नहिं आई नहि कोईआवत जात I
कहो रे कोई ………
शशि रिपु वर्ष भानु रिपु जुग सम हरि रिपु कर रहो घात ,
गृह नक्षत्र अरु वेद अर्ध कर सोई बनत अब खात I
कहो रे कोई ……………
मग पंचक ले गयो सांवरो तातें जिय अकुलात ,
सूर श्याम बिन विकल बिरहनीं मग जोवत दिन रात I
कहो रे कोई हरि आवन की बात I
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मंदिर अर्ध -मंदिर को आधार से लम्बवत आधा करनें पर पंद्रह 15 बन जाता है I
हर अहार – शेर का अहार -मांस I
अजिया भखन -बकरी का भोजन -पाती या पत्ती I
शशि रिपु -दिन I
भानु रिपु -रात I
हरि रिपु -काम देव i
गृह -9
नक्षत्र -27
वेद -४ = 40 का अर्ध =20 या विष i
मग पंचक -पञ्च इन्द्रियों का मार्ग -मन i
बाहर की इन्द्रियां तो यन्त्र मात्र हैं i
मर्म स्थल या चित्त को संवेदना देने बाले कारकों की गति ब मार्ग -मन है i

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