गहरे पानी पैठ

पारदर्शिता का आह्वाहन करता नैतिक ब्लॉग

123 Posts

276 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 19172 postid : 1316581

तेरे आने की आहट..............

Posted On: 28 Feb, 2017 Hindi Sahitya में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

तेरे आने की आहट सुनी थी मगर
वो थे मगरूर सपनों में सोते रहे ,
नींद से जब जगा कर ली तूने खबर
हड़बड़ाए ,उठे ,आँख धोते रहे .
*******************************.
वक़्त नें जब कहा ,कुछ हों पाबंदियां
वो ये बोले कि कैसी ये नादानियाँ ,
नासमझ थे ,बढ़ायीं यूँ नाकामियां
रोज ढोनें लगे सबकीं रुश्वायियाँ .
होश आया तो पाया के सब कुछ लुटा
फिर भी मदहोश सपनों में खोते रहे .
तेरे आने की आहट सुनी थी मगर …..
**********************************.
जिनका हक़ था उन्हें तो संभाला नहीं
पर संभालीं स्वयं कीं कई पीढियां ,
स्वार्थ की मंजिलें सारीं चढ़ते गए
और फिसलते गए फ़र्ज़ कीं सीढियाँ .
अपनें अनुभव क़ी सारी विरासत लिए
वे अंधेरों में सबको डुबोते रहे .
तेरे आने क़ी आहट सुनी थी मगर ……
***********************************
समय नें कहा तुम थे मालिक मगर
तुमको करना था क्या ,तुम रहे बेखबर ,
देखो कितना मगन है गगन , ये धरा
ये उमंगों का सूरज कहाँ ले चला !
विजय का कमल हर ह्रदय में खिला
ख्यालों में जो हम सजोते रहे .
तेरे आने कीआहट सुनी थी मगर …….
*********************************

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran