गहरे पानी पैठ

पारदर्शिता का आह्वाहन करता नैतिक ब्लॉग

126 Posts

283 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 19172 postid : 1318725

अपनी हसरतों के सितारे....

Posted On: 11 Mar, 2017 कविता में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

उपवन को
कोयल पर प्यार आया,
समां ने-
परवाने को
फिर फुसलाया,
किरण -
अनुरक्त हुई
नटवर को बाँध लाई,
बिहँसी, मुस्कुराई
पूनम की जुन्हाई .
अनंत ने
अनुभूतियों के द्वार खोले,
गूंगा बोले….
तो क्या बोले
अनुभूतियों का कोष
कैसे खोले ?
सो -
आह्लादित हो
करने चला
रूप रस गंध को
परिभाषित,
शब्द स्पर्श को
विभाषित.
उमंगित हो
नाच उठी धरा,
पुलकित हो
गगन-
हो उठा मगन,
और चितेरा
भर अंक
अपनी प्रेयसी को
ले चला,
न जाने
अरमानो के किस लोक
टाँकने को
उसके तन मन पर
अपनी हसरतों के सितारे..
************************

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

4 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
March 17, 2017

आदरणीय भोला नाथ पाल जी ! सुन्दर भाव से परिपूर्ण अति सुन्दर कविता ! आपकी कविता लाजबाब है ! सादर अभिनन्दन और हार्दिक बधाई !

Shobha के द्वारा
March 22, 2017

श्री भोलानाथ जी सुंदर गुलाब की पंखुड़ियों की तरह कोमल पंक्तियाँ अति सुंदर भाव

Bhola nath Pal के द्वारा
March 23, 2017

आदरणीय सद्गुरु जी ! आपकी पसंद मेरा सौभाग्य है . सदर ………..

Bhola nath Pal के द्वारा
March 23, 2017

आदरणीय डॉ शोभा जी !ह्रदय से आभार . सादर ……


topic of the week



latest from jagran