गहरे पानी पैठ

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स्वागत है, बुलावा है, निमंत्रण है ! ........

Posted On: 23 Mar, 2017 कविता में

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जहाँ -
मरुथल की शांति हो,
नीरवता भी .
उमंग ,उत्साह ,आह्लाद,
आमोद की निर्झरणी भी .
अंतस की बगिया में
फूल खिले हों,
झरनें झरते हों,
कोयल कूकती हो ,पपीहा पुकारते हों ,
देखनें वाला
खुद को भी देखता हो,
विराट को भी .
आंखें बंद करके भी, खोल करके भी .
ध्यान से भीतर,
प्रेम से बाहर .
जहां
बसंत भी हो,
फागुन भी .
उत्सव भी आनंद भी ,
अनुग्रह भी, धन्यवाद भी .
न त्याग, न भोग
दोनों का अतिक्रमड़ .
गुजर भी जाएं छुएं भी न .
तैयारी हो-
जीवन के महारास में-
उतरनें की ?
तो आजाओ !
स्वागत है ,बुलावा है ,निमंत्रण है !!

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
March 27, 2017

श्री भोला नाथ जी भाव पूर्ण सुंदर मोहक कविता

Bhola nath Pal के द्वारा
March 30, 2017

आदरणीय डॉ शोभा जी ! जहां मन से अनंत को स्पंदित करना हो वहां “मोहक “कितना औचित्य पूर्ण ?सत्कार………


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