गहरे पानी पैठ

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होने दो परिवर्तन पल पल ...........

Posted On: 26 Mar, 2017 Hindi Sahitya में

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इतना कह कर “ह्रदय तुम्हारा”
हरते क्यों तुम जीवन सारा,
हे अंतस के देव द्वैत को हरो
ह्रदय की मेटो हलचल I
*****************************
हमने तो इतना चाहा था
भ्रम टूटे पथ अवगाहा था,
अगर कुछ नहीं तो आकुल मन
पागल है? करता कोलाहल ?
**************************
घर से आँगन से गलियारा
फ़ैल रहा तेरा उजियारा ,
जैसे सुरभि पवन के झोंके
स्वासों को करते हैं चंचल I
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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
March 26, 2017

बहुत ही सुन्दर साहित्यिक रचना आदरणीय भोला नाथ जी! बहुत दिनों के बाद मन आनंदित हो गया!

Bhola nath Pal के द्वारा
March 26, 2017

श्री जे एल सिंह जी ! आपकी पसंद मेरे लिए प्रेरणा है .बहुत बहुत धन्यवाद ………


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