गहरे पानी पैठ

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हे निर्बंधन !

Posted On: 7 Apr, 2017 कविता में

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प्रभु मेरे !
दो शक्ति
कुछ ऐसी भक्ति
टूटे भ्रम
पग पग पर
अटकनें का क्रम .
दो ऐसा पथ
दिखाई दे तेरा रथ
तेरा प्रकाश
प्रकाश में नहाया
समग्र विभास
मिटे द्वैत भान
” तू ही तू ”
उदय हो ज्ञान
शिथिल हों
अहं के बंधन
चेतना क्यों करे
क्रंदन
हे निर्बंधन !

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