गहरे पानी पैठ

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तुम हलाला की औलाद हो...........

Posted On: 19 Apr, 2017 कविता में

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रे !
नर पिशाचो
लो देख लो
भर गया
तुम्हारे पापों का घट,
जाग उठीं
हलाला से हलाल
तुम्हारी बेटियां
इनमें नापो
अपना कद .
सम्मान इन्हें भी चाहिए
इन्हें भी चाहिए
संवेदनाओं का कोमल स्पर्श ,
इन्हें भी चाहिए
हसरतों की उन्मुक्त उड़ानें
उमंगों का
असीम उत्कर्ष .
कैसे बाप हो ?
लानत है !
कब समझोगे ?
तीन तलाक
कोढ़ है
और …हलाला ?
कोढ़ में खाज
बाप हो,
समझाओ जरा
ये कैसी तुम्हारी रश्में?
ये कैसे रिवाज ?
क़यामत का खौफ खाओ
बंद करो
दोजख का द्वार .
मुझे तुमनें क्या बनाया
प्रश्न यह नहीं
प्रश्न यह है
कि ….
तुम हलाला की औलाद हो .
*****************************

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